जन्म

Updated: May 15


दीवारों पर उगी काई

कविताओं जैसी है

जो चेतना की दरारों से फूटी हैं

इनका उग आना हमारे बस में नहीं


जिसने भी काव्य को जाना है

लिखा है उसे पता है

कि कविता, गहरी हो या उथली

जन्म के लिये

जन्मदाता

स्वयं चुनती है

तेजी

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